Monday, November 12, 2018

एक बार फिर तुम हाथ जोड़ के रुला गये।

                            Sumit patel
                 
                      चलो अच्छा हुआ कि
                      तुम आ गए ,
                      उजड़ी नैनों की दुनिया
                      फिर बसा गए ।
                      तुम अचानक से मुझको क्या मिले,
                      दिल में बिजली बनकर समा गए।
                      आओ एक बार फिर मैं तुम्हारे कदम छू लूँ,
                      एक बार फिर तुम हाथ जोड़ के रुला गये।।

Saturday, November 10, 2018

तेरी सूरत में मुझको ख़ुदा चाहिए।

               
                           Sumit patel 
तुम कहो तो कहूं मुझको क्या चाहिए,
तेरी सूरत में मुझको ख़ुदा चाहिए।

तुम ये मानो न मानो है हक़ीक़त यही,
तेरी यादों का जंगल घना चाहिए ।

तुमको चाहूं तुम्हारी इबादत करूँ,
तुझसे मेरे ख़ुदा ये रज़ा चाहिए ।

है वीरान सी मन की बगिया मेरी,
एक तू ही मुझे बागबाँ चाहिए ।

शामो ओ सहर तुम ज़ेहन में रहो,
दिल में मेरे सदा ये सदा चाहिए ।

दिल है मेरा तुम्हारा ही अपना मकाँ,
तेरा आना वज़ह बेवज़ह चाहिए ।

दूर होकर भी कहां तुम दूर होते हो,
तुम मुझमें हो मुझे और क्या चाहिए।

देखो कभी मुझसे नजर न फ़ेर लेना,
सुमित को तुम्ही तुम रहनुमा चाहिए।।

झुका दिया मैंने मेरे सरको।


                            SUMIT PATEL

तेरे क़दमो में झुका दिया मैंने मेरे सर को,
तमन्ना है इतनी रखूं ऊंचा सदा तेरे सर को।।

रस्म ए उल्फत को चलो मिलकर निभाते हैं,
मोहब्बत में किनारे से न मैं सरकूं न तुम सरको।।

किसी बन्दिश की खातिर सरकना गर जरूरी है,
सरकना है तो सरको कलम करके मेरे सर को।।

Thursday, September 13, 2018

हिंदी दिवस की हार्दिक बधाई।
                         SUMIT PATEL

जग के मस्तक पर राज रही भारत के माथे की बिंदी है,
शब्दों का सामर्थ्य अनन्त, रसभरी, सुपावन हिंदी है।

उच्चारण संग लिए व्याकरण मन हर्षित कर जाती है,
खुसरो, मीरा, सूर, जायसी नित मोती नये लुटाती है।

दिनकर पन्त निराला नीरज गाते गाते कह जाते हैं ,
मानवता की एक धरोहर माँ हिंदी तुमको शीश झुकाते हैं।

You you कह इठलाती दुनिया समझो तो अभिशाप है,
आओ दिखलाएं हिंदी में 'तुम' के संग संग आप है ।

गंगा जैसी पावनता इसकी, सुंदरता में कालिंदी है,
शब्दों का सामर्थ्य अनंत,रसभरी सुपावन हिंदी है।।

Monday, July 30, 2018

महक तेरी किधर नहीं।

       
                                       SUMIT PATEL
घर वही दर वही
नगर वही डगर वही
तय हुआ था जो कभी
है अभी सफर वही
मैं वही नजर वही
तीर वही जिगर वही
ख़ुशबू भरी वादियों में
महक तेरी किधर नहीं।

Friday, July 20, 2018

अधर चुप रहेंगें मगर बात होगी!!!


                                   SUMIT PATEL
कभी मेरी तुमसे मुलाकात होगी।
अधर चुप रहेंगें मगर बात होगी।।

नयन कुछ कहेंगें नये भाव लेकर,
कहो क्यूं गये तुम मुझे घाव देकर।
आँखों से तेरे भी बरसात होगी।
अधर चुप रहेंगें मगर बात होगी।।

ये कलियां ये भौरें ए उपवन,दरीचा,
हैं साक्षी तुम्हें मैंने सन्दल से सींचा।
महक इनकी तेरे सदा साथ होगी।
अधर चुप रहेंगें मगर बात होगी।।

स्मृतियां पुरानी ज़हन में जगेंगीं ,
मेरी  वफ़ा  की  कहानी कहेंगीं ।
खमोशी भी मेरी,तुमसे सवालात होगी।
अधर  चुप  रहेंगें मगर  बात होगी ।।

प्रतीक्षा की बातें मन का दर्पण कहेगा,
यादों  के  मोती  भी  अर्पण  करेगा ।।
मेरी आँखों में आंसू तेरी सौगात होगी।
अधर  चुप  रहेंगें  मगर  बात  होगी ।।

कभी मेरी तुमसे मुलाकात होगी।
अधर चुप रहेंगें मगर बात होगी ।।

Wednesday, July 4, 2018

तुम फिर नहीं आए।

       
                               SUMIT PATEL

लाख जतन करके ये दिल तुमको बुलाए,
आंखे  भी तेरी राह  में पलकें हैं बिछाए ,
तुम फिर नहीं आए, तुम फिर नहीं आए।
तुम फिर नहीं आए,तुम फिर नहीं आए।।

रुत भी बड़ी हसींन, हैं रंगीन नज़ारे ,
हैं प्यार का पैगाम मेरे, चाँद सितारे ,
बादल भी तेरी याद के बरसात ले आए।
तुम फिर नहीं आए,तुम फिर नहीं आए।।

स्वाति की एक बूंद को चातक जो निहारे,
वैसे ही मेरे दिल की सदा तुमको पुकारे।
देखो कि  मेरी आस  कहीं टूट न जाए ।
तुम फिर नहीं आए,तुम फिर नहीं आए।।

प्रीत भरी रीति तेरी , मुझको निभानी,
गाऊं मैं तेरे  गीत लिखूं तेरी  कहानी ,
आ जाओ मिलके सुर से ताल मिलाएं।
तुम फिर नहीं आए,तुम फिर नहीं आए।।

कैसे ये कहूं तुझसे कितना प्यार किया रे,
तन  मन  भी  तेरे वास्ते  निसार  किया रे ,
बाकी  बची है जान, कहीं  जान न जाए ।
तुम फिर नहीं आए, तुम फिर नहीं आए।।

जिसमें ख़ुशी हो तेरी वही काम किया रे ,
रखना इसे संभाल के दिल तुझको दिया रे,
आँखों ने तेरे ख़्वाब के सपनें हैं सजाए ।
तुम फिर नहीं आए,तुम फिर नहीं आए।।

लाख जतन करके ये दिल तुमको बुलाए,
आंखे  भी तेरी राह  में पलकें है बिछाए ,
तुम फिर नहीं आए, तुम फिर नहीं आए।
तुम फिर नहीं आए, तुम फिर नहीं आए।।