Sumit patel
Friday, November 16, 2018
Thursday, November 15, 2018
तुम होती तो।
Kavita ki ek chhoti kalam
तुम होती तो सुन्दर होता
जंगल का हर एक नजारा,
पेड़ों पर बनी झोपडी
और भी रोचक होती,
कुछ और जरा निखरा होता
नदियों का हर एक किनारा,
उन वृझों को थोड़ा और परिभाषित कर पाता
जिनको सरकार ने संरक्षण दिया है,
उदाहरण में तुम्हें ,
यह बताने का प्रयास करता कि,
तुम भी मेरे प्रेम को मन के किसी सतह में
जरूर संरक्षण कर लेना,
और तुम्हारी बात करूं?
तो तुम तो मेरे मन की भूमि पर
गुलाब के पौधे की तरह उपजी हो,
जिसकी महक को मेरे मन की मिट्टी
अपनी आत्मा तक में संजोये है,
वहाँ के उपवन में खिले फूलों
के बारे में भी बताता, कि
देखो तुम्हारी बदन की खुश्बू के आगे
इनकी गन्ध मद्धिम सी हो गयी है,
और तुम्हारी हंसी को देखकर
शर्माकर समय से पहले ही मुरझाने लगे हैं।
गेरुआ और घाघरा नदी की गहराई
तुम्हारे आँखों की गहराई से बहुत कम है,
और हाँ! वो देखो मदमस्त घूम रहे दो हाथी
तुम्हारे प्रेम की विशालता के आगे कितने छोटे हैं,
अभी अभी इधर से भागा है हिरन का जोड़ा
जानते हो क्यों?
कहीं तुम्हारी चंचलता से वह लज्जित न हो जाए,
और जो ये मगर के बच्चे तुम्हे देखकर
पानी में वापस तैरने लगे है,
ये जानते हैं तुम्हारी नजरों के तीर
इनसे ज्यादा घायल कर सकते हैं।
तन के साथ न सही मन के सदा साथ थीं तुम
तुम्हारी स्मृतियां हर पल राह दिखाती रहीं,
और आज भी देखो न तुम दूर तक नहीं हो,
पर जाने क्यूं, तुम्हारी स्मृतियां मुझसे तुम्हें लिखाती रहीं।
जाने क्यूं "सुमित"मुझसे तुम्हें लिखाती रहीं।।
और हां सच में!
Wednesday, November 14, 2018
Tuesday, November 13, 2018
वो मेरी समस्याओं का मुझे हल दे गया ।
Kavita ki ek chhoti kalam
समझौता कर लेते हैं,
अक्सर ज़िन्दगी में ऐसे पल आ ही जाते हैं,
विवशता की बेड़ियां परिस्थितियों को जकड़ लेती है,
समस्याएं जटिल होकर हौंसले को रौंदना चाहती हैं,
जिजीविषा तमस के आवरण को लपेटकर सो जाती है,
वेदना के उत्तुंग शिखर से अश्रु धार निर्झर बन बह निकलती है,
और फिर अचानक!
धैर्य रखना,राह तकना,मंजिल मिलेगी मन से आत्मा विरहणी कह गुजरती है।
पल तो पल में बीत जाएगा हर्ष का हो या विषाद का,
यत्किंचित वृतांत रह जाएगा भविष्य में अनुवाद का,
छूटना, जकड़ने का और टूटना, बेड़ियों का आगामी अर्थ होता है
और परिस्थितियों का रोना रोना कर्मवाद में सदैव व्यर्थ होता है,
समस्याएं जितना विवश करेंगी, हौंसला उतना ही अदम्य होगा,
संघर्षों से जूझकर आया परिणाम अतुलनीय और सुरम्य होगा,
ऐसे में उसका अकस्मात सम्मुख आ जाना मेरे हौंसले को संबल दे गया,
मौन रहकर ही सही "सुमित" वो मेरी समस्याओं का मुझे हल दे गया।
जिसकी तलाश मैं ख़्वाबों मे करता था वो अपनी झलक मुझे कल दे गया,
मेरा विश्वाश जीवन्त कर गया, मानो वो डूबते को तिनके का बल दे गया।।
Monday, November 12, 2018
Saturday, November 10, 2018
तेरी सूरत में मुझको ख़ुदा चाहिए।
Sumit patel
तुम कहो तो कहूं मुझको क्या चाहिए,
तेरी सूरत में मुझको ख़ुदा चाहिए।
तुम ये मानो न मानो है हक़ीक़त यही,
तेरी यादों का जंगल घना चाहिए ।
तुमको चाहूं तुम्हारी इबादत करूँ,
तुझसे मेरे ख़ुदा ये रज़ा चाहिए ।
है वीरान सी मन की बगिया मेरी,
एक तू ही मुझे बागबाँ चाहिए ।
शामो ओ सहर तुम ज़ेहन में रहो,
दिल में मेरे सदा ये सदा चाहिए ।
दिल है मेरा तुम्हारा ही अपना मकाँ,
तेरा आना वज़ह बेवज़ह चाहिए ।
दूर होकर भी कहां तुम दूर होते हो,
तुम मुझमें हो मुझे और क्या चाहिए।
देखो कभी मुझसे नजर न फ़ेर लेना,
सुमित को तुम्ही तुम रहनुमा चाहिए।।
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