Friday, November 23, 2018

चाँद में तुमसे बात करते रहे

                        Sumit patel


आज फिर दिल तेरे ख्यालों में खो गया ।
भरी महफ़िल तुम बिन अकेला हो गया ।
हम तो चाँद में तुमसे बात करते रहे'सुमित',
जाने कब पूरनमासी रात में सबेरा हो गया।।

राहों में तेरे पलकें बिछी हैं

                         Sumit patel


मुझसे मोहब्बत के सबूत न मांग ऐ मेरे अहल-ए-सनम,
राहों में तेरे पलकें बिछी हैं,होंठों ने क़दमो के निशान चूमे हैं।

Thursday, November 22, 2018

खुदगर्ज़ हूं मग़र इतना नहीं

                         Sumit patel

तेरे भरोसे रहकर मुझे मेरी क़िस्मत आजमाना है।
नफ़रत का पहाड़ काटकर मोहब्बत का दरिया बहाना है।
खुदगर्ज़ हूँ मग़र इतना नहीं कि तेरे इश्क़ पर अफ़सोस करूं,
मेरी जान तुझसे ये मेरा प्यार मुझे आखिरी दम तक निभाना है।।

खुदगर्ज़=selfish.

कि तू मेरी किस्मत .......

                        Sumit patel

यूं तो किसी के आगे सर झुकाना मेरी फ़ितरत में नहीं है,

पर तेरे क़दमो में न झुके सर ये मेरी हिम्मत में नहीं है।

'सुमित"तुम्ही तुम साथ रहती हो मेरे ख़्वाबों ख्यालों में,

क्या फर्क पड़ता है भला कि तू मेरी किस्मत में नही है।।


Sunday, November 18, 2018

मेरा मन तेरा है बावरिया।

                            Sumit patel


मेरे सांवरिया मेरे सांवरिया,
मेरा मन तेरा है बावरिया ।
मेरे सांवरिया मेरे सांवरिया,
सांवरिया ओ मेरे सांवरिया।

तेरे प्रीत की रीत निराली है,
मेरे मन की गागर ख़ाली है,
तेरी मिले झलक तो छलक छलक,
मैं भरलूं अपनी गागरिया।
सांवरिया ओ मेरे सांवरिया,
मेरा मन तेरा है बावरिया।।

विरहन बन पुरवा आई है,
बदरी यादों की लाई है,
अब बरस जा तरस रहे नैना,
बन मिलन की प्यासी बादरिया।
सांवरिया ओ मेरे सांवरिया,
मेरा मन तेरा है बावरिया।।

मेरे नयन तेरे आराधक हैं,
तेरे प्रेम के ही हम साधक हैं,
कुछ प्रेम बहा मेरे मनमितरे,
कर पार ज़रा मन की नैय्या।
सांवरिया ओ मेरे सांवरिया,
मेरा मन तेरा है बावरिया।।

मुस्कान तेरी अलबेली है,
ख़ुशबू सख़ी सहेली है,
कविता बन महक उठो प्रियतम,
मैं नाचूँ बाजे झांझरिया।
सांवरिया ओ मेरे सांवरिया,
मेरा मन तेरा है बावरिया।।


यूं हीं न तेरे दीवाने हैं,
हम आशिक़ कुछ मस्ताने हैं,
पद इधर मेरे मग में रख जा,
लूं चूम जरा पद डागरिया ।
सांवरिया ओ मेरे सांवरिया,
मेरा मन तेरा है बावरिया।।

Saturday, November 17, 2018

तुमको तुमसे ही मैं मांगता रह गया।

                         Sumit patel

लाख उनका करम आ अचानक मिले,

जैसे  बिछड़े हुए  दो कथानक  मिले ।

माना मिलकर भी हम उनसे मिल न सके,

खूबसूरत थे फिर भी वो पल जो मिले ।।


मन में गुलज़ार फूलों की बगिया खिली,

मानों संगम पे आकरके नदियां मिली ।

जिनकी आँखों में ही था बसेरा मेरा,

उनकी आँखों से मेरी ये अंखियां मिली।।


देखकर मैं तुम्हें देखता रह गया ,

तुम बदल क्यूं गये सोचता रह गया।

तुमने देखा मुझे तुम सिमट से गये,

कुछ न मैंने कहा कांपता रह गया।।


तुमको तुमसे ही मैं मांगता रह गया,

जाने क्या क्या वज़ह बेवज़ह कह गया।

तुम आकर बगल से निकल भी गयीं,

कुछ भी कह न सका अनकहा रह गया।।


हाथ जोड़ा जो तुमने चिढ़ा कर गयी,

कर्ज मुझपर नया तुम चढ़ा कर गयी।

छूने देती क़दम ऋण उतरता मेरा ,

मुझको असहाय फिरसे बनाकर गयी।।


देखकर यूँ तुम्हें जाने क्या हो गया,

एकपल को लगा मैं ख़ुदा हो गया।

तेरा जाना भी, जाना, गंवारा नहीं,

फिर भी जाना मुझीसे जुदा हो गया।।

Friday, November 16, 2018

उसमे बड़ा मजा था इसमें भी बस मज़ा ही।

                    Sumit patel

इतना बड़ा गुनाह न इतनी बड़ी ख़ता थी,

तेरी आशिकी ने जाना कितनी बड़ी सजा दी।


थी स्याह रात दुनिया तुम चाँद बनके आये,

इक दीप को सजाया फिर रौशनी बुझा दी।


कैसा अज़ब नज़ारा फूलों की वादियों का,

रूठा हुआ है माली बेज़ार है कली भी ।


पाऊँ भी कैसे तुमको जब खोने को कुछ नहीं,

दिल तो तुम्हारा था ही अब नाम जिंदगी की।


पलकों में सजा लेना,कभी नजरों से गिरा देना,

तूने दोस्ती भी जाना कुछ इस तरह अदा की।


वो साथ होना तेरा फिर मुझसे रूठ जाना,

उसमें बड़ा मज़ा था इसमें भी बस मज़ा ही।।