Friday, August 23, 2019
Thursday, August 22, 2019
जिंदगी का मक़सद ही तुम्हें प्यार करना है
अब ज़िन्दगी का मक़सद तुम्हें प्यार करना है
तुम्हारी याद में जीना है
तुमसे कोई भी शिकायत नहीं करना है
बस तुम्हारी याद में जीना है
तुम छोड़के गए कोई मज़बूरी रही होगी
तुम्हारी हर मज़बूरी का साथ निभाना है
तुम्हें मैं बहुत चाहता हूं हद से ज्यादा
तुम्हें चाहते ही जाना है
तुम्हारी याद में पल पल खोना मुझे अच्छा लगा
बस यही बात मुझे तुमको बताना है
तुम कोई भी कैसा भी फैसला लो
तुम्हारे हर फ़ैसले को सिर माथे लगाना है
तुम बहुत आगे जाना चाहती हो
कसम से तुम्हें बहुत आगे ले जाना है
तुम कोई भी अफ़सोस न करना मुझे लेकर
जो मेरी किस्मत में है मुझे वही मिलना है
तुम्हें मुझसे ज्यादा गैरों पर भरोसा है
मुझे तुम्हारे भरोसे का सम्मान करना है
माफ़ करना मग़र ये भी जरूरी है
तुम्हारे इश्क में मुझे कुछ झूठ बोलना है
मेरी दुनिया मे आग लगाने वाले बहुत खुश हैं
तुम मुझसे रूठी नहीं हो उनसे बस यही कहना है
तुम मुझसे रूठी हो तो जब तक चाहो रूठी रहना
मग़र तुम मुझसे नाराज़ नहीं हो दुनिया को यही बताना है
तुम्हारे लिए मैं कुछ भी न कर सका
बस इसी बात पर जिंदगी भर मुझे पछताना है
तुम्हें मैंने इंसान कम ख़ुदा ज्यादा माना है
तुम सुनो तुम्हे बस यही बताना है
तुम्हारे पांव की मिट्टी मांगी तो तुम्हें गलत लगा
माफ़ी चाहता हूं अभी भी उसे ही माथे लगाना है
आख़िरी बात है कि तुम्हारा पता ढूंढता हूं मैं सुमित
तुम बुरा न मानना मुझे तुमसे मिलने आना है
तुम मिल न सको कोई बात नहीं पर सुनो मेरी
तुम्हारे रस्ते पर तुम्हें देखने आना है।
तुम्हारे कदम छुए और छूने की तमन्ना अभी भी
तुम क़दम छूने देना मुझे तुमसे यही मांगना है।
मैंने सुना है तुम्हें मेरे नाम से भी चिढ़ है
मुझे वही चिढ़ अपनी आंखों से तुम्हारी आँखों मे देखना है।
Wednesday, August 14, 2019
Sunday, August 4, 2019
तुम्हारी यादें
आज यूं ही अचानक तुम्हारी यादों के संग
एक अज़ब हलचल उठी है मन मे,
दिल के एक कोने में कोई अपरचित सा डर फिर
अभी इतनी खुशी कि शायद तुमने भी मुझे याद किया है।
तुम्हारी यादों में खोकर अक़्सर मैं ख़ुद को खोने से बचा लेता हूं
तुम्हारी यादों से गुफ्तगू करता हूँ कुछ अपने भी किस्से सुना देता हूं
तन्हाई में तुम्हारी यादें गुनगुनाती हैं दिल में मेला कर जाती हैं
भरे मेले में तुम्हारी यादें कभी कभी निपट अकेला कर जाती हैं
सुनो तुम तुम्हें तुम्हारी यादों के चंद किस्से सुनाने वाला हूं
तुम्हारी तरह ये भी बड़ी प्यारी हैं
बड़ी मासूम हैं बिल्कुल तुम्हारे जैसी
मेरे हर अहसास में सांस सांस में रवां होती रहती हैं तुम्हारी यादें
मुस्कुराती हैं कभी बिल्कुल तुम्हारी तरह खिलखिलाकर हँस देती हैं तुम्हारी यादें
मैंने कई बार आँख मिलाकर देखा है ये भी उतनी ही गहरी हैं जितनी गहरी हैं तुम्हारी आँखें
इनके भी अहसास का मिठास बिल्कुल वैसा ही है जैसे मिश्री और शहद में लिपटी रहती हैं तुम्हारी बातें
एक हाथ चेहरे पे रखकर कभी कभी कुछ सोचने लग जाती हैं
लिखते लिखते दांतों से दबाकर कलम को छेड़ने लग जाती हैं
तुम्हारी यादें अक्सर मेरी उलझनों को सुलझा जाती हैं
खुद भी मुस्कराती हैं मेरे दिल को भी हसाँ जाती हैं
सावन की फुहारें जैसी तुम्हारी यादें वीरान मन को हरा भरा कर देती हैं
हाँ तुम्हारी यादें तुम्हारी आहट बनकर मेरे साथ हमेशा रहती हैं
तुम्हारी यादें मेरे जीवन की अमूल्य पूँजी हैं
तुम्हारी यादें मेरी खुशियों की कुँजी हैं
कैसे खोऊँ इन्हें तुम्हारी यादें मेरी धरोहर हैं
तुम्हारी यादें अक्सर कोई न कोई कमाल करती हैं
मेरी मोहब्बत की इबादत को मालामाल करती हैं
कोई क्या कभी समझे कि कितनी खास हैं ये
तुम्हारी अनुपस्थिति में तुम्हारा अहसास हैं ये
यादें बताती हैं तुम्हारी आँखों मे मेरा वो डूब जाना
तुम्हारे कदमों की मिट्टी को उठा माथे से लगा लेना
याद है अब भी तेरे कदमो को बहाने से स्पर्श कर लेना
तेरी मुस्काती आँखों में तेरे मन के भाव पढ़ लेना
तुम्हारी यादों ने बताया है मोहब्बत नाम है तेरा
झुकाकर सर खड़े हैं हम इबादत काम है मेरा
इसी ने तो सिखाया है तुम्हारे बिन मुझे जीना
हृदय से आंख में आये हुए अश्कों को मुझे पीना
तुम्हारी याद में मैंने टूटा कलावा जोड़ रक्खा है
तुम्हारी याद से ही रिश्ता हृदय का जोड़ रक्खा है
तुम्हारी याद के किस्से कभी भी खत्म न होंगें
रहेंगें तब भी ये जिंदा जिंदा जब हम नहीं होंगें
तेरे पलकों के मसकारे तेरी आँखों की गहराई
ग़ुलाबी होंठ वो तेरे तेरे जलवों की अंगड़ाई
चमकता चाँद सा चेहरा केशों की घटा छाई
सोने का बदन तेरा उतर नभ से परी आई
हंसी तेरी महकती सुबह का फ़ूल लगती है
रुबाई सी तेरी बातें हृदय को छूने लगती हैं
कहो कैसे तुम्हारी यादों से अब दूर जाऊंगा
इजाजत मांगता हूं अब इन्हें दिल में बसाऊंगा
इन्हीं के संग रहने दो इन्हें अपना बनाऊंगा
करूँगा शायरी इन पर इन्हें कविता बनाऊंगा।
I miss you😢😢
SUMIT
Monday, July 1, 2019
आख़िर तुम चले ही गए,
कितने दिनों से तुम्हारे आने का इंतजार था,
तुम्हें नज़र भर के देखने की आरजू बलवती हो रही थी।
हृदय एक अपरिचित हलचल से भरता जा रहा था,
इस तरह एक दिन मौसम बदला
और तुम आये भी,
इन आँखों ने दीदार भी किया
तुम्हारी एक झलक भर से मन शीतल हो गया।
रोम रोम में प्रसन्नता मुखर हो रही थी
तुम्हें रोज मिल सकता इतना नसीब वाला नहीं मग़र
मेरे लिए सबसे बड़ी नेमत यही थी कि तुम करीब हो।
और फिर वही तुम्हारी यादों का सिलसिला चलता रहा,
तुमसे मिलने को नए नए असफल प्रयास करता रहा,
ऐसे में ही एक दिन कहानी ने रुख बदल लिया अपना
तुम्हारे जाने की ख़बर मेरी नींदों पर भारी होने लगी।
अक्सर ही तुम चले जाओगे इस ख्याल से नींद टूट जाती थी,
घण्टों जेहन में तुम्हारी सूरत को निहारता गया,
चुपके चुपके मन में बस तुम्हें ही पुकारता गया।
लो वह सुबह भी आ गई जो यहां से तुम्हें ले जाएगी,
ये पागल मुझे तुम्हारी आहट से दूर न कर पाएगी।
शायद तुम्हारा भी मन उदास है कल की रात से ही,
कोई पीर खटक रही होगी मन मे जाने की बात से।
जागते सोते घण्टो विचार में डूबा होगा मन,
याद खूब आया होगा गांव में व्यतीत किया हर क्षण,
कि कल चले जायेंगे कुछ दिनों के लिए गांव से,
भरे पूरे परिवार की बरगद की छांव से।
मन किया होगा कि दादी को पुकार लूं मनुहार से,
और कहूं "अम्मा कोई कहानी सुना दो न", प्यार से।
इस तरह होते करते सुबह हो गई होगी
जाने की तैयारियां रास न आ रही होगी
भारी मन से इधर उधर आना जाना,
अपनो से दूर न जाने की इच्छा और जाने की विवशता
एक ओर अपनों का साथ दूसरी ओर कर्तव्य और जिम्मेदारी
भारी भारी आवाज को छिपाकर कहना
मम्मा सब पैक कर दिया है न कुछ छूटा तो नहीं
खाने की चीजें बहुत क्यों रखती हो
ये सब खाने का मेरा मन नहीं करता
मेरे वो कपड़े और हां वो किताब रख देना जरूरी है
फ़िर आंखों में आंसुओं को छिपाकर तैयार होना
कभी कुतूहल बस इनसे मिलना कभी उनसे मिलना
और अचानक फिर "कुछ छूटा तो नहीं",
हां सच मे बहुत कुछ छूटा जा रहा था,
बचपन के साथी शीतल सी छाया,
छोटे भाई से अनायास का लड़ना।
घर, घर का बरांडा गली आंगन,
खिड़की के पर्दे जो हवा से कभी उड़ा करते हैं,
वो फूलों की डालियाँ जिनपर फूल खिला करते हैं।
वो मिट्टी का दिया जो वर्षों से ड्योढ़ी पर जलता आया है,
कुछ दिनों के लिए माँ का आँचल छूट रहा पिता का साया है।
कुछ जहन में उठती पुरानी यादें,
खट्टे मीठे जीवन की सौगाते।
इस तरह सोच विचार करते करते,
बिना मन के थोड़ा बहुत ब्रेकफ़ास्ट करके
मन ही मन में बुदबुदाते हुए कहा होगा
चलो अब जाने का समय आ गया
सामान सारा रख दिया जाता है
अब तक जो छिपा बैठा था देर से आँख में
आखिर आपकी आंख से वो आंसू भी छलक गया होगा।
आंसुओं को पोंछकर शुभ विदा कहते हुए
सबने आगे बढ़ने की दुवा दी होगी।
अधीर मन रुआंसी आंख और कर्तव्य का बोध
मन मे रख आप भी गाड़ी पर बैठ गए होंगे।
गाड़ी आख़िर उस जगह पहुंच जाती है,
जहाँ बेसब्री से मेरी आँखें तुम्हारी राह तकती थी।
मैं छिपकर खड़ा देखता जा रहा था राह की ओर,
अचानक मुझे आती दिखी तुम हमारी ओर ओर।
शायद देखा हो तुमने सामने खड़ी थी बाइक मेरी
जान बूझकर खड़ा किया था बस तुम्हें ये बताने को,
कि मैं भी यहीं कहीं खड़ा हूँ कब से
बेक़रार होकर एक झलक तुम्हारी पाने को।
मैं झांकता रहा एक कोने से कांपता रहा मेरा शरीर,
भला तुम ही बताओ विवशता से बड़ी होती है कोई पीर।
तुम्हारे साथ प्राण तो नहीं गए पर प्राणशक्ति चली गई,
मैं अवाक निस्तब्ध हो गया मेरी हर खुशी चली गई।
मेरी जिंदगी चली गई मेरी आरजू चली गई,
मुददत की मेरी तलाश मेरी ज़ुस्तज़ू चली गई।
कभी मुस्कराकर मिली कभी मिली मुझे जो खिली खिली,
मुझसे नाराज़ थी जो इक परी मेरी वो परी चली गई।
इसे विवशता कहूं या बुझदिली तुमको सामने से निहार न सका,
बड़े क़रीब से निकल गए तुम मैं पुकार न सका।
तुम ही कहो तुम्हें पुकारने की हिम्मत मैं कैसे जुटाता,
तुम्हारे जाने से मैं ख़ुश हूं कि दुखी तुम्हें कैसे बताता।
नहीं मैं इतना भी डेरिंग नहीं कि आंसूभरके मुस्कराता।
तुम्हारे लिए क्या हूं मैं इससे कोई बड़ा फर्क़ नहीं पड़ता,
पर मेरी आंखें रोती तो शायद तुमको भी ये अच्छा नहीं लगता,
माना कि तुम्हारा दूर होना मेरे लिए ग़म की बात है,
मगर दूर जाकर आगे बढ़ना,तरक्की करना गर्व की बात है।
तुम्हारी बुलन्दी की राह में आंसू बहाता तो लानत की बात थी,
और तुम्हें दूर जाता देख आंख न भीगे तो कयामत की बात थी।
इसलिए जाओ साथी तुम्हें तुम्हारा सफ़ऱ मुबारक़ हो,
मुझे अब तुम्हारी याद के संग जीने का तरीका सीखना है।
मेरे लिए हंसने से कहीं ज्यादा अब रोना ज़रूरी है,
आंसुओ से वफ़ा की बाग़ में मोहब्बत का फूल सींचना है।
मेरी आँखों से जितनी दूर हो तुम उतना शायद आकाश भी नहीं,
और मेरे दिल के जितने करीब हो तुम उतना तो मैं खुद भी नहीं।
अच्छा चलो जाओ कर्तव्यपथ पर आगे बढ़ो
सफलता की सीढ़ियों पर सीढियां चढो।
पर ये भी याद रखना ये हक़ीक़त है
दूर जाकर भी तुम मुझमें कहीं रह ही गए।
देखो न आख़िर तुम चले ही गए।।
सुमित
Tuesday, June 25, 2019
इक काम मेरा तुम कर दो न।
फुर्सत में बैठे हो तो इक काम मेरा तुम कर दो न।
धड़कन में है नाम तुम्हारा तुम धड़कन मेरी पढ़ लो न।
ख़ुद ही ख़ुद का नहीं रहा, हां सच में ये खुदगर्ज़ी है,
फ़िर वही कहानी दोहराकर फिर मुझे सेल्फिश कह दो न।
इसने उसने जाने किसने क्या क्या मुझको बोला है,
मैं ऐसा वैसा कभी नहीं था जानम सबसे कह दो न।
आकर ठहरे थे कुछ दिन से आज मग़र तुम जाते हो,
जाते जाते कुछ अपनी कह दो कुछ मेरी मुझसे सुन लो न।
इस तरह बेरुखी मुझसे तेरी यूं जानम सही नहीं जाती,
हूं निर्दोष अगर तो बरी करो या सजा मुझे तुम दे दो न।
चलो कहो तुम एक कहानी जिसमें राजा रानी हो,
या तुम बिन कैसे मैं जीता हूं मुझसे मेरी सुन लो न।।
Sunday, June 23, 2019
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