Saturday, January 4, 2020

Happy new year 2

नए वर्ष का आगमन हो गया है, आपको नववर्ष की हृदय से अनन्त शुभकामनाएं, जीवन की हर परीक्षा में ईश्वर आपको सफल करें। आपका जीवन सदैव फूल की तरह महकता और मुस्कुराता रहे।आपको नववर्ष की बधाई अपनी एक पुरानी कविता के माध्यम से समर्पित करता हूँ जिसे आपके लिए मैंने पिछले वर्ष लिखी थी।और यह मुझे भी अति प्रिय है।
पुनः नववर्ष मंगलमय हो।

नित प्रेरणा का संगम और हर्ष दे तुम्हें।l
जग में अनेक खुशियाँ नव वर्ष दे तुम्हें।।

सूरज की चमक संग संग चन्दा का रूप हो,
तारों से सजा आंगन अम्बर स्वरूप हो,
हो चांदनी का साया न गम की धूप हो,
अनुकृति रहे असम्भव अनुपम अनूप हो,
मान संग प्रसिद्धि उत्कर्ष दे तुम्हें।
जग में अनेक खुशियां नव वर्ष दे तुम्हें।

चितवन में बाँकपन और चेहरा ग़ुलाब हो,
फूलों को लजाता हुआ यौवन शबाब हो,
होंठों की हंसी तेरी नित लाज़वाब हो,
हो शायरी मेरी तुम शायर का ख़्वाब हो,
तन मन में दे मधुरता प्रहर्ष दे तुम्हें।
जग में अनेक खुशियां नव वर्ष दे तुम्हें।।

Sunday, December 29, 2019

Happy new year part 1

Best wishes
नव वर्ष आपके जीवन में सफलता,सुख, समृद्धि और आनन्द का सूचक हो।

दिवस माह सब बीत गए ये साल भी जाने वाला है।
बदलाव की नूतन गंगा में फिर समय नहाने वाला है।
परिवर्तन की इस नौका में बैठो खुद ही पतवार बनो,
तुम जिधर चलोगे उधर चलेगा साल जो आने वाला है।
नव वर्ष मंगलमय हो।
Best of luck
Happy new year .
Love you..

Sunday, December 15, 2019

सिलसिले तेरी मोहब्बत के


बिछड़ने वाले तेरी मोहब्बत के सिलसिले भी अजीब हैं
तसवीर सीने से लगाता हूं कभी तेरे दस्तख़त चूम लेता हूँ।

वो बदल गया है भरोसा इस बात पर भला मैं कैसे करलूं
तसवीर में वही भोलापन साइन का स्टाइल भी पुराना है।

मत फैलाओ ये अफवाह वो नाराज़ है मुझसे
पिछले दफ़ा मिली थी तो मुस्कुराके मिली थी।
                                          sumit patel...

Sunday, December 1, 2019

Happy birthday जन्मदिन है तेरा प्यारे मुबारकबाद देनी है।


अपार हर्ष हो रहा है आज पोस्ट करते हुए। माफी चाहता हूं थोड़ा देर से कर पाया क्योंकि काफी दिनों से रोज लिख रहा था पर पूरा नहीं कर पा रहा था। विगत मास में आपका जन्मदिवस था और मेरे पास उपहार देने के लिए मेरी भावनाओं के अतिरिक्त और कुछ नहीं है।
Happy birthday dear
सुमित

होठों पर मुस्कान रहे और जीवन में खुशहाली हो।
महके महके फूल खिलें हर ओर तेरे हरियाली हो।
जन्म दिवस की ढेर बधाई अन्तस् की गहराई से,
होली सा हर दिन हो तेरा हर रात तेरी दीवाली हो।१

बड़े बैलून ब्ल्यू रंग के हवा में फोड़कर आए।
जनम दिन की मुबारकबाद भी दिल खोलकर लाए।
कभी मिलना तुम्हें भी हम कसम से पार्टी देंगें,
अकेले  याद  में  तेरी  समोसे  तोड़कर  आए।।२

तुम्हारी याद न आई हो ऐसा कौन सा दिन था,
तुम्हारी याद लेकिन आज मुझे भरपूर आई है।
ख़ुशी का पल सजा आलम तमन्ना न अधूरी हो,
जनमदिन की मुबारक़बाद बधाई हो बधाई है।।३

सदा खुशियों की दुनिया मे तुम्हारा बसेरा हो।
सुहानी हो शाम महकता हर एक सवेरा हो।
जन्मदिवस कुछ इस तरह मुबारक हो सुमित,
बनो चमन के फूल तुम्हें खुशबुओं ने घेरा हो।।४

मन शांत रहे हिमगिरि जैसा।
तन महके तेरा सन्दल सा।
यश कीर्ति बढ़े अम्बर जैसी,
हो निर्मलता गंगा जल जैसा।।५

सितारों से भरा आंगन महकती रात देनी है।
चमन के फूल तुम मेरे तुम्हे सौगात देनी है।
तुम्हारे व्यस्त जीवन से कुछ पल सुमित दे दो,
जनम दिन की तुम्हें प्यारे मुबारकबाद देनी है।।६

चमकता चांद सा चेहरा हँसी से फूल खिल जाए।
तेरी गहरी सी आंखों से समंदर खुद लजा जाए।
केश  तेरे  घने  काले  घटा  के  रूप  लगते  हैं,
सुरीला कंठ कोयल सा गज़ल बोली से बन जाए।।७

आना  मुबारक़ हो  तुझे जाना  मुबारक़ हो।
प्यार का  हर  एक अफ़साना  मुबारक़ हो।
तोहफ़े  में  तुम्हें  देने  तुम्हारे गीत  लाया हूँ,
जनमदिन पर तुझे मेरा नज़राना मुबारक़ हो।।८

खुशयों का खज़ाना हो,होठों पे तराना हो।
साथी तू जहां जाए, क़दमों में जमाना हो।।

सब रिश्ते सुन्दर हों, कभी दूर न अपने हों।
जो तुमने  कभी देखे, पूरे  हर  सपनें  हों ।।

हर शाम सुहानी हो, परियों की कहानी हो।
गम  दूर  रहें तुमसे, हँसती जिन्दगानी हो।।

बहकी  पुरवाई हो, ख़ुशबू  संग लाई हो ।
तू कदम जहां रख दे,महकी अंगनाई हो।।

चमके से सितारे हो, हर आँख के तारे हो।
दुनिया भी  मानेगी, तुम  जग से न्यारे हो।।

हर रात दिवाली हो, पूजा की थाली हो ।
होंठों से कही तेरी, हर बात निराली हो ।।

फूलों में बसेरा हो,कलियों का घनेरा हो।
सूरज की किरन के संग, दूर अँधेरा हो।।

पल पल में मस्ती हो,तेरी पलकें हँसतीं हो।
हर खुशियां बसें जाकर,जहां तेरी बस्ती हो।।

रंगीन  नज़ारा  हो, उल्फत  का सहारा हो।
चाहत के  बगीचे में, हर फूल  तुम्हारा हो।।

गुलज़ार गुलिस्तां हो,तेरे मन में सरसता हो।
अमृत से भरा बादल,छा करके बरसता हो।।

सुन्दर  से  नज़ारे हों, मौसम  में बहारें हों ।
मैं  गाऊं  जितने भी, हर गीत  तुम्हारे हों।।


Saturday, October 26, 2019

Happy Diwali , एक गुमनाम चिट्ठी तुम्हारे नाम।


Happy diwali
प्रकाश के पर्व दीपावली की आपको हार्दिक शुभकामनाएं। आज के दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम अयोध्या लौटे थे। सभी अयोध्या वासियों ने घी के दिये जलाकर उनका स्वागत किया था। आज भी जो लोग घर से दूर रहते हैं आज के दिन घर लौट आते हैं। लेकिन आप शायद इसबार नहीं आने वाले हैं, कोई बात नहीं कुछ जरूरी काम होते जिन्हें करना आवश्यक होता है। हम दीपों से आपके नाम की रंगोली बनाकर आपके लिए शुभकामना करेंगें, हो सके तो आप भी मेरे नाम के पहले अक्षर का एक दीप माला बनाने का प्रयास करना,ये न हो सके तो चुपके से एक दीपक मेरा नाम लेकर जलाकर अपने से करीब कहीं रख देना।  सम्भवतः मैं आपकी आदतों से पहले से परिचित हूं, आजकल आप कुछ परेशान से होगे काम का बोझ होगा सफ़ल होने की अनेक चुनौती होगी। पर आप घबराना नहीं, हौसला बुलन्द रखना जीत बस आपकी ही होगी। अक्सर इस महीने में आपको जुक़ाम हो जाया करता था थोड़ी सावधानी रखिएगा।क्योंकि यदि स्वास्थ्य खराब हो तब लक्ष्य की ओर बढ़ने में अनेक अड़चनें आती हैं।सुबह सुबह रोज योगा करने का प्रयास करना ताकि मस्तिष्क स्वस्थ रहे, उदास होने पर मेरी कविताएं पढ़ लिया करना,केवल आपकेलिए ही लिखा है इन्हें। और मैं कर भी क्या सकता हूँ आपके लिए, एक बात और पिछली बार नाराज़ होकर आपने मिठाई भी नहीं खिलाई थी, इस बार ऐसा मत करना। इकट्ठे दोनों बार की उम्मीद में हूं तोड़ मत देना। काश ये चिट्ठी आज ही आपको मिल जाती तो बहुत अच्छा होता अन्यथा जब कभी भी आप इसे पढ़ोगी ये चिट्ठी सार्थक हो ही जाएगी। एक बार फिर से हैप्पी दीवाली, I love you, I miss you, लो हिम्मत करके लिख दी मैने चिट्ठी आपके नाम की बिना आपका नाम लिखे हुए।
                                                     आपका
                                                   सुमित पटेल


Monday, October 7, 2019

भले बाद मुद्दत मग़र बिछड़े मिलते हैं जरूर।


वक़्त तो हर वक़्त हमारा इम्तहान लेता है
हम भी चलो वक़्त का इम्तहान लेकर देखते हैं
बीते हुए लम्हों ने वादा किया था साथ देने का
उन लम्हों को ज़हन में फिर दोहराकर देखते हैं
उसकी तस्वीर क्यों हमेशा धुंधली नज़र आती है
चलो एक बार आँख से पानी पोंछकर देखते हैं
आदतें उसकी अपनाकर उसे मनाने की तमन्ना है
कागज़ पर शेर कुछ उल्टे हाथ से लिखकर देखते हैं
कड़ककर चमकती बिजली के दिल में पीर है कोई
पहले तुम चौंकते थे आज हम चौंककर देखते हैं
गंवारा है नहीं जिसे अपने होंठों पर हमारा नाम तक लाना
हम उसी की याद में जीना गंवारा करके देखते हैं
वो ग़ुलाब की पंखुड़ी सी नाज़ुक तितली सी चंचल है
यूं ही नहीं हम रोज उसे ख्वाब में डूबकर देखते हैं
भले बाद मुद्दत मगर बिछड़े मिलते हैं जरूर 
सुमित कयामत तक उसका इंतज़ार करके देखते हैं।

Saturday, October 5, 2019

मैं तुम्हारे प्रेम को जीता हूँ really



बात इश्क़ की करनी है मोहब्बत और प्यार की करनी है प्रेम के सच्चे स्वरूप को देखना है समझना है मात्र देखना समझना ही नहीं प्रेम को जीना है। किसी के प्रेम में जीना नहीं है वरन किसी के प्रेम को जीना है। क्योंकि किसी के प्रेम में जीना तब तक ही सम्भव है जब तक वह भी तुम्हें प्रेम करे तुम्हारे साथ रहे। परन्तु किसी के प्रेम को जीना सदैव सम्भव है चाहे वह तुम्हें प्रेम करे या न करे तुम्हारे पास हो या दूर कोई फ़र्क नहीं पड़ता। हां एक बात जरूर है किसी के प्रेम में जीने की अपेक्षा किसी के प्रेम को जीना जरा कठिन है। क्योंकि किसी के प्रेम में जीना तो आत्ममुग्धता है किसी के द्वारा स्वयं के लिए किए गए सद्व्यवहार के प्रति भावनात्मक अभिव्यक्ति है कि अमुक व्यक्ति मेरा बड़ा खयाल रखता है वह तो बस मेरे लिए ही बना है आदि आदि। परन्तु प्रेम को जीना ज़रा अलग है दूसरे के प्रति अपने हृदय में प्रेम का बीज बोना प्रेम का वृक्ष लगाना परन्तु अपने लिए कोई भी कामना न करना प्रेम को जीना कहलाता है। सुबह से शाम तक अपने प्रियतम का शुभ सोचना बिना किसी अपेक्षा के प्रियतम की खुशी में अति प्रसन्न होना प्रेम में जीने के लक्षण हैं। इस बात का कभी ध्यान ही नहीं आता कि प्रियतम मेरे लिए क्या कर रहे हैं अपितु मैं प्रियतम के लिए क्या क्या करूँ कैसे उनका और अधिक शुभ कर सकूं पूरी तन्मयता से यही विचार चलते रहते हैं। प्रियतम का शुभ करने की चेष्टा जैसे जैसे बढ़ती जाती है वैसे वैसे हम असहाय होते चले जाते हैं। क्योंकि एक बन्दा जिसे हम बहुत प्यार करते हैं जिसे दुनिया की सारी खुशियां देने की आरजू पाल रखी है और वास्तव में हम उसे कुछ दे नहीं पाते क्योंकि कुछ भी करो प्रेम में कम ही रहता है।और जब मुझे इसका ज्ञान हुआ तब मैंने स्वंय को बड़ा विवश पाया मेरा अहंकार मेरे प्रेम की विवशता के सामने चकनाचूर हो गया ।
हो भी क्यों प्रेमपात्र(जिससे व्यक्ति प्रेम करता है ) के साथ व्यक्ति बिल्कुल असहाय हो जाता है। यही प्रेम की पीड़ा है कि हमें पता ही नहीं चलता कि हम क्या कर सकते हैं हम सबकुछ करना चाहेंगें अपनी प्रेमिका को पूरा ब्रम्हांड देना चाहेंगे! लेकिन हम कर क्या सकते हैं?  मैं भी तुम्हारे प्रेम में असहाय और असमर्थ हो गया हूँ मैं तुम्हारे लिए कुछ कर सकता हूँ या मैंने तुम्हारे लिए कुछ किया है मेरा ये गुमान टूट गया है इस गुमान और अहंकार के टूटने के बाद मेरे पास मात्र तुम्हारा प्रेम बचा है सुद्ध प्रेम अमर प्रेम। अतः मैं स्वयं को तुम्हे समर्पित करके तुम्हारे प्रेम को जीता हूं। तुम्हारे स्वरूप में खो जाता हूँ, तुम्हें अनवरत प्रेम करता हूँ ।
Happy navratri
I love you
I miss you
                                                        Your
                                              Patel sumit(pappu)