Tuesday, June 25, 2019

इक काम मेरा तुम कर दो न।


फुर्सत में बैठे हो तो इक काम मेरा तुम कर दो न।
धड़कन में है नाम तुम्हारा तुम धड़कन मेरी पढ़ लो न।

ख़ुद ही ख़ुद का नहीं रहा, हां सच में ये खुदगर्ज़ी है,
फ़िर वही कहानी दोहराकर फिर मुझे सेल्फिश कह दो न।

इसने उसने जाने किसने क्या क्या मुझको बोला है,
मैं ऐसा वैसा कभी नहीं था जानम सबसे कह दो न।

आकर ठहरे थे कुछ दिन से आज मग़र तुम जाते हो,
जाते जाते कुछ अपनी कह दो कुछ मेरी मुझसे सुन लो न।

इस तरह बेरुखी मुझसे तेरी यूं जानम सही नहीं जाती,
हूं निर्दोष अगर तो बरी करो या सजा मुझे तुम दे दो न।

चलो कहो तुम एक कहानी जिसमें राजा रानी हो,
या तुम बिन कैसे मैं जीता हूं मुझसे मेरी सुन लो न।।

Sunday, June 23, 2019

मर्ज़ी तुम्हारी तुम जिधर जाओगे।


सुना है कि कल परसो कि नरसों में तुम चले जाओगे।
आँख से दूर सही सुमित दिल में मेरे तुम ठहर जाओगे।
तुम्हारी राहों में फ़ूल सा बिखरने का इरादा कर लिया मैंने,
इधर जाओगे कि उधर जाओगे मर्ज़ी तुम्हारी तुम जिधर जाओगे।
                                   Sumit K patel

Thursday, June 13, 2019

तुम्हारी भी दास्ताँ हूँ मैं।




कभी मुश्किल कभी आसाँ हूँ मैं।
जिंदगी तेरे हाथ का तमाशा हूँ मैं।

भटके हुए को राह दिखाकर तो देखो,
कुछ घड़ी को लगेगा कि इंसां हूँ मैं।

भूखे के हाथ में रोटी देकर वो फोटो लेता है,
इंसान बन न पाया समझता है फ़रिश्ता हूँ मैं।

मेरा लगाया शज़र मुझसे रोकर कहने लगा,
मर गया हूँ बस तुम्हारी सेल्फ़ी में जिंदा हूँ मैं।

दरिया रहम की भीख तेरी गंवारा नहीं मुझको,
तुझे किस क़तरे ने कह दिया कि प्यासा हूँ मैं।

सच को झूठ बनाने का कारोबार जोरों पर है,
और कुछ नहीं बस इसी बात से परेशां हूँ मैं।

फ़ुर्सत निकालकर मुझे पढ़ लिया करो सुमित,
कहानी अपनी ही नही,तुम्हारी भी दास्तां हूँ मैं।