Tuesday, June 5, 2018

मेरा तो संसार ही, साथी तेरा प्यार।

दोहा छन्द

पागल राही प्रेम का , देखे तेरी राह ।
तेरा नाम पुकारता , मन में तेरी चाह ।। 1

ऊब गया मन साख़ से , गया परिंदा छोड़ ।
देख विवशता पेड़ की , वो जाए किस ओर।। 2

रहें बड़ों के संग हम , जीवन का ये मूल ।
डाली से जब तक जुड़े , लगते सुन्दर फूल।। 3

तेरी खातिर हम जलें , हमको रखना याद ।
बुझता दीपक रात से , बोल पड़ा ये बात ।। 4

मुझमें हो तुम यूँ बसी , तन में जैसे सांस ।
आँखों से हो दूर तुम , मन के कितने पास।। 5

मुझपे हंसती है हंसे , लेकिन रखना याद ।
दुनियां की औकात क्या , जब होगी वो साथ।। 6

सूरज को है डूबना , होगी काली रात ।
खुद से जब बढ़ने लगे ,साये की ओकात।। 7

हंसकर करता मैं विदा , कहते मुझसे आप ।
मेरी तो बस पीर  ये  ,  गये छुड़ाकर हाथ  ।। 8

आँख लगी थी याद संग , कैसे लगती आँख ।
नींद सुलाकर थक गयी , लौटी खाली हाथ ।। 9

सुनों कभी कुछ कह रही , आँखों की बरसात ।
मन  में  उठती  पीर  से , आँसू  करते  बात  ।। 10

तुम  निकले  हो  जीतने , पूरा  ये  संसार ।
मेरा  तो  संसार  ही , साथी  तेरा  प्यार   ।। 11

                         -      सुमित पटेल

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